पन्द्रह अगस्त, उन्नीस सै, सैतालिस को मेरा देश भारत हो गया था, पू्र्ण रुप से आजाद किन्तु मेरे मुहल्ले का भारत उस ही दिन से, परतन्त्रता की बेड़ियों में जकड़ गया है--- अपनी शादी के बाद
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हसते रहने से सारे दूख दूर हो जाते है और खुशी आती है, सो खुश रहीये दूसरो को भी खुश रहने दीजीए।
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